आधुनिक रोबोटिक तकनीक ने हर्निया के उपचार को पहले की तुलना में अधिक सटीक, सुरक्षित और मरीज के लिए आरामदायक बना दिया है। आज उपचार का उद्देश्य केवल बीमारी हटाना नहीं, बल्कि कम दर्द, जल्दी रिकवरी और बेहतर जीवन गुणवत्ता देना भी है।
दुनियाभर में हर वर्ष लगभग दो करोड़ हर्निया सर्जरी की जाती हैं और यह सबसे सामान्य शल्य प्रक्रियाओं में से एक मानी जाती है। भारत में भी हर वर्ष लाखों लोग हर्निया की समस्या से प्रभावित होते हैं, लेकिन जागरूकता की कमी और डर के कारण कई मरीज सही समय पर उपचार नहीं ले पाते।
अपने वर्षों के अनुभव में मैंने कई ऐसे मरीज देखे हैं जो हर्निया को “सामान्य सूजन” समझकर नजरअंदाज करते रहे। कई लोग तब आते हैं जब तकलीफ बढ़ चुकी होती है या दैनिक जीवन प्रभावित होने लगता है।
लेकिन आधुनिक लेप्रोस्कोपिक और रोबोटिक तकनीकों ने इस सोच को बदलना शुरू कर दिया है।
आज कई मामलों में मरीज अपेक्षाकृत कम दर्द, छोटे चीरे और तेज रिकवरी के साथ जल्दी सामान्य जीवन में वापस लौट पा रहे हैं।
जब पेट की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और अंदर का हिस्सा बाहर की ओर उभरने लगता है, तो उसे हर्निया कहा जाता है। यह अक्सर पेट या जांघ के आसपास सूजन या उभार के रूप में दिखाई देता है।
इसके सामान्य लक्षण हो सकते हैं:
पहले:
पारंपरिक ओपन सर्जरी में:
अब:
रोबोटिक तकनीक में अत्याधुनिक उपकरणों और त्रि-आयामी दृश्य प्रणाली की सहायता से सर्जरी अधिक सटीक तरीके से की जाती है।
इसके प्रमुख लाभ हैं:
अपने अनुभव में मैंने महसूस किया है कि रोबोटिक सर्जरी ने जटिल हर्निया सर्जरी में कार्य करने के तरीके को काफी बदल दिया है।
पारंपरिक लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की तुलना में रोबोटिक तकनीक सर्जन को अधिक लचीलापन और बेहतर नियंत्रण प्रदान करती है। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में उपकरणों की गति और कलाई जैसी मूवमेंट सीमित होती थी, जबकि रोबोटिक प्रणाली में उपकरण मानव हाथों की तरह अधिक स्वाभाविक और सटीक तरीके से काम कर पाते हैं।
मेरे अनुभव में यह विशेष रूप से जटिल और सूक्ष्म कार्यों के दौरान काफी उपयोगी साबित होता है।
रोबोटिक प्रणाली का अत्याधुनिक उच्च-गुणवत्ता त्रि-आयामी (3D) दृश्य भी एक बड़ा लाभ है, जिससे शरीर के अंदर की संरचनाएं अधिक स्पष्ट और विस्तृत दिखाई देती हैं। इससे सर्जरी के दौरान सूक्ष्म हिस्सों पर अधिक सटीकता के साथ कार्य करना संभव हो पाता है।
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि सर्जन के हाथों में हल्का कंपन भी हो, तब भी रोबोटिक प्रणाली उस कंपन को फिल्टर करके अत्यंत सटीक तरीके से कार्य करने में सहायता करती है।
मैंने कई ऐसे मरीज देखे हैं जो वर्षों तक डर या व्यस्त जीवनशैली के कारण सर्जरी टालते रहे। लेकिन आधुनिक तकनीकों के कारण अब कई मरीज अपेक्षाकृत जल्दी सामान्य गतिविधियां शुरू कर पा रहे हैं।
नहीं!
हर मरीज की समस्या अलग होती है। उपचार का सही तरीका मरीज की स्थिति, हर्निया के प्रकार, उम्र, स्वास्थ्य और अन्य कारकों को देखकर तय किया जाता है।
इसीलिए सही जांच और विशेषज्ञ परामर्श बहुत आवश्यक है।
भारत में भी रोबोटिक सर्जरी तेजी से आगे बढ़ रही है। सरकारी और निजी अस्पतालों में अब जटिल जठरांत्र, मूत्ररोग, स्त्रीरोग और हर्निया सर्जरी में इसका उपयोग बढ़ रहा है। हाल ही में मुंबई के एक सरकारी अस्पताल में कुछ ही महीनों में सौ से अधिक रोबोटिक सर्जरी सफलतापूर्वक की गईं।
आज सर्जरी का उद्देश्य केवल बीमारी का इलाज करना नहीं है, बल्कि मरीज को:
रोबोटिक सर्जरी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
“कई मरीज वर्षों तक हर्निया को सामान्य सूजन समझकर टालते रहते हैं। सही समय पर जांच और उचित उपचार से बड़ी जटिलताओं से बचा जा सकता है।”
If you are experiencing these symptoms, timely consultation can prevent complications.
Dr. Rajesh Sinha | Laser, Laparoscopic & Robotic GI Surgeon | NH MMI Hospital, Raipur
25+ Years of Experience | 10,000+ Successful Surgeries | Expertise in Laparoscopic & Robotic GI Procedures
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